Here is a compilation of Essays on ‘Independence Day’ for the students of Class 3, 4, 5, 6, 7, 8, 9, 10, 11 and 12 as well as for teachers. Find paragraphs, long and short essays on ‘Independence Day’ especially written for School Students and Teachers in Hindi Language.

List of Essays on Independence Day


Essay Contents:

  1. स्वतन्त्रता दिवस (15 अगस्त) । Essay on Independence Day in Hindi Language
  2. स्वाधीनता दिवस (पन्द्रह अगस्त) | Paragraph on Independence Day (15th of August) for School Students in Hindi Language
  3. स्वतंत्रता दिवस-पन्द्रह अगस्त । Essay on Independence Day for Teachers in Hindi Language
  4. हमारे राष्ट्रीय पर्व स्वतंत्रता दिवस | Essay on Our National Festival, Independence Day for School Students in Hindi Language
  5. स्वतंत्रता-दिवस | Essay on Independence Day for Teachers in Hindi Language

1. स्वतन्त्रता दिवस (15 अगस्त) । Essay on Independence Day in Hindi Language

1. प्रस्तावना ।

2. स्वतन्त्रता दिवस का महत्त्व ।

3. मनाने की रीति ।

4. उपसंहार ।

1. प्रस्तावना:

कहा गया है: ”पराधीन सपनेहुं सुख नाहीं ।” अर्थात् पराधीनता सपने में भी किसी को अच्छी नहीं लगती है । स्वतन्त्रता व्यक्ति का अधिकार है, उसकी प्रवृति है । महान् दार्शनिक रूसो ने भी कहा है कि ”मनुष्य जन्म से ही स्वतन्त्र पैदा होता है । वह अपने ही बनाये हुए बन्धन में बंधता चला जाता है ।”

यह भी कहा गया है कि स्वतन्त्रता की सूखी रोटी घी की चुपड़ी रोटी से कहीं अच्छी लगती है । स्वतन्त्रता का अर्थ एवं महत्त्व सोने के पिंजरे में बन्द पक्षी से अधिक बेहतर कौन जान सकता है । खुले आसमान में स्वछन्द उड़ान भरने वाले पंछी और पिंजरबद्ध पक्षी के जीवन का अन्तर एक स्वतन्त्र एवं गुलाम देश के लोगों की जीवनशैली से किया जा सकता है ।

जहां तक देश की बात है, कोई भी राष्ट्र बहुत अधिक दिनों तक पराधीनता की बेड़ियों में जकड़ा नहीं रह सकता है । इसी तरह हमारे देश भारत को ब्रिटिश उपनिवेशवादी शक्तियों से लगभग 200 वर्षो की लम्बी गुलामी से आजादी मिली थी 15 अगस्त सन को । इसी गौरवशाली, पावन दिवस को हम राष्ट्रीय त्योहार के रूप में मनाते हैं ।

2. स्वतन्त्रता दिवस का महत्त्व:

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हमारे राष्ट्रीय त्योहारों में स्वाधीनता दिवस अगस्त का विशेष महत्त्व है । इसका महत्त्व सभी त्योहारों से सर्वाधिक है । इसी दिन हमने बरसों की गुलामी से मुक्ति पायी थी । अंग्रेज सरकार की गुलामी एवं अत्याचार से संत्रस्त जनता ने 15 अगस्त को स्वतन्त्रता की खुली हवा में सांस ली थी ।

हमें आजादी ऐसे ही नहीं मिली थी । यह आजादी हमें मिली थी अनेक अमर शहीदों, क्रान्तिकारियों, नेताओं तथा कुछ अनाम शहीदों के त्याग एवं समर्पण से । देश की आजादी में बाल-बच्चे, बूढ़े प्रत्येक स्त्री-पुरुष का भी योगदान था । यह आजादी हमें समस्त भारतवासियों के प्रयत्नों से मिली थी ।

यह आजादी हमें 1857 के क्रान्तिकारियों-नानासाहब, मंगलपाण्डे, तांत्याटोपे, बहादुरशाह जफर, रानी लक्ष्मीबाई, रानी दुर्गावती, दादा भाई नौरोजी फिरोजशाह मेहता, वीर सावरकर, भाई राणा, लाला हरदयाल, जाकिर हुसैन, लाल लाजपतराय, सुभाषचन्द्र बोस, राजेन्द्र प्रसाद, महात्मा गांधी, तिलक, नेहरू, भगतसिंह, रामप्रसाद बिस्मिल, सुखदेव, राजगुरु, चन्द्रशेखर आजाद, चाफेकर बखु आदि ने दिलाई थी ।

15 अगस्त, 1947 को लालकिले की प्राचीर से बोलते हुए देश के प्रथम प्रधानमन्त्री ने देशवासियों को सम्बोधित करते हुए आर्थिक, सामाजिक, राजनैतिक गुलामी से पूर्ण रूप से मुक्त होने का गर्व भरा सन्देश सुनाया था ।

15 अगस्त, अर्थात् स्वाधीनता दिवस हमें आजादी के गौरव को याद दिलाने के साथ-साथ यह भी स्मरण दिलाता है कि आजादी की लड़ाई में हिन्दू मुस्लिम, सिख, ईसाई, जैन, बौद्ध, पारसी सभी ने सक्रियता से भाग लिया था ।

यह हमारी एकता का ही प्रतिफल है कि हम अंग्रेजों की कैद से आजाद हुए । हमारी गुलामी की बेड़िया कटीं । इस आजादी की लड़ाई में नरम दल, गरम दल के देशभक्त क्रान्तिकारियों ने सक्रिय रूप से अपना योगदान दिया ।

आजादी की यह लड़ाई हम भारतीयों के लिए ही महत्त्व नहीं रखती है, यह लड़ाई तो दक्षिण अफ्रीका तथा मध्य एशिया एवं द॰पूर्व॰ एशिया के लोगों के लिए प्रेरणा के स्त्रोत के रूप में महत्त्व रखती है । अमर बलिदानी शहीदों की गाथाएं आज भी हमारे लिए प्रेरणा एवं आदर्श का एक ऐसा उदाहरण हैं, जो हमें याद दिलाता है कि व्यक्ति से बढ्‌कर देश होता है ।

अपने देश के लिए अपने स्वार्थो का बलिदान कर देना ही सच्ची राष्ट्रीयता कहलाता है । यही सच्ची राष्ट्रभक्ति है । भारत की सार्वभौमिक एकता, उसके राष्ट्रीय गौरव की दृष्टि से स्वतन्त्रता दिवस का महत्त्व हमारे लिए सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण है ।

3. मनाने की रीति:

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15 अगस्त, 1947 का गौरवशाली दिवस प्रतिवर्ष सम्पूर्ण देश में अत्यन्त धूमधाम एवं उल्लास के साथ मनाया जाता है । प्रातःकाल सूर्योदय के साथ ही घर-घर में, सरकारी कार्यालयों में, स्कूलों, कॉलेजों अन्य विभागों में देश का राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा झण्डा लहराने लगता है ।

स्कूल तथा कॉलेजों में स्वतन्त्रता दिवस के अवसर पर अनेक राष्ट्रीय भावों से युक्त कार्यक्रम होते हैं । प्रभात फेरियां निकाली जाती हैं । शहीदों की जय-जयकार करते हुए बच्चे गांव-गांव तथा शहरों की गलियों से निकल पड़ते हैं । भाषण, गीत, नृत्य के रंगारंग कार्यक्रम होते हैं ।

शहीदों का पुण्य स्मरण किया जाता है । भारत की राजधानी दिल्ली में 15 अगस्त को ऐतिहासिक स्थल लालकिले की प्राचीर पर तिरंगा फहराया जाता है । देश के प्रधानमन्त्री भाषण देते हैं । भारत की राजधानी दिल्ली में राष्ट्रीय ध्वज को 21 तोपों की सलामी दी जाती है ।

प्रधानमन्त्री राष्ट्र की प्रगति के लिए योजनाओं की घोषणा करते हैं । उनका भाषण  ”जय हिन्द” के उद्‌घोष के साथ समाप्त होता है । रात्रि में संसद भवन, राष्ट्रपति भवन को रोशनी से सजाया जाता है । दुकानों एवं राजमार्गो को भी सजाया जाता है ।

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पूरा देश राष्ट्रभक्ति एवं राष्ट्रगान के स्वर से गूंज उठता है । पूरे राष्ट्र में मिष्ठान्न वितरण होता है । स्वतन्त्रता दिवस अमर रहे के नारों से स्वतन्त्रता के अमर रहने की कामना की जाती है । दूरदर्शन एवं आकाशवाणी से कार्यक्रमों का प्रसारण होता है ।

4. उपसंहार:

इस प्रकार स्पष्ट है कि भारत के स्वतन्त्रता आन्दोलन में देश के समस्त वर्गो, जातियों, धर्मो के लोगों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया था, वहीं कई क्रान्तिकारियों एवं नेताओं ने भी अपना योगदान दिया था । इन सभी के प्रयत्नों से हमें यह आजादी मिली है ।

स्वतन्त्रता के बाद हमारे देश ने सभी क्षेत्रों में अभूतपूर्व प्रगति की है । आज हमारा देश विश्व के सबल राष्ट्रों में गिना जाता है । सूचना, संचार एवं तकनीकी के क्षेत्र में भारतवासियों ने पूरे विश्व में अपनी धाक जमायी है । वहीं साहित्य, संगीत तथा कला के क्षेत्र में वह काफी आगे बढ़ा है ।

आज हम सामाजिक, आर्थिक, राजनैतिक दृष्टि से विकास की हर सीढ़ियों को पार कर रहे हैं, किन्तु दुःख के साथ कहना पड़ता है कि आज हमारे देश में गरीबी, जनसंख्या वृद्धि, अशिक्षा, भ्रष्टाचार जैसी समस्याएं भी मुंह बांये खड़ी हैं, जो हमारे लिए एक चुनौती हैं ।

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भारतीय स्वतन्त्रता आन्दोलन का एक दुःखद पहलू है: भारत एवं पाक का विभाजन । स्वतन्त्रता की यह कीमत हमें चुकानी पड़ी थी । आज भी हम इसे  भुल नहीं पाते हें । जो कभी हमारा अंग था, वह पाकिस्तान !

आज वही पाकिस्तान हमारे देश में आतंकवाद की जड़ें जमाने में लगा हुआ है । हमारे देश का कश्मीर प्रान्त, जिसका हिस्सा वह अनाधिकृत रूप से दबाये बैठा है । पाकिस्तान ने हमारे देश पर तीन बार आक्रमण किया ।

तीनों बार मुंह की खाने के बाद भी वह भारत की तरफ दोस्ती का हाथ बढ़ाने से कतराता है, जबकि भारत सहृदयता का परिचय देते हुए, उनके प्रति दोस्ती का भाव रखता है । पाकिस्तान अपनी शत्रुता इस कदर हमसे निभा रहा है कि हमारे देश में आतंकवादी हमले करवाता है । कश्मीर में खून की नदी बहा रहा है । वहीं जेहाद के नाम  पर मानव हत्या को धर्म का नाम दे रहा है ।

स्वतन्त्रता के पश्चात भारतवर्ष को इन्हीं कट्टर जेहादियों से जूझना है । इतना अवश्य कहा जा सकता है कि स्वतन्त्रता हमारे राष्ट्र के लिए ऐतिहासिक, आर्थिक, राजनीतिक ही नहीं, सांस्कृतिक महत्त्व भी रखती है । हम स्वतन्त्र देश के नागरिक हैं । हमें अपने देश पर गर्व है । हमारी स्वतन्त्रता अमर रहे, इसके लिए सभी नागरिकों में सच्ची राष्ट्रभक्ति, निष्ठा एवं ईमानदारी होनी चाहिए ।


2. स्वाधीनता दिवस (पन्द्रह अगस्त) | Paragraph on Independence Day (15th of August) for School Students in Hindi Language

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हमारे राष्ट्रीय त्योहारों में स्वाधीनता दिवस पन्द्रह अगस्त का विशेष महत्त्व है । इसका महत्त्व सभी राष्ट्रीय त्योहारों में इसलिए सर्वाधिक है कि इसी दिन हमें शताब्दियों-शताब्दियों की गुलामी की वेणी से मुक्ति मिली थी । इसी दिन हमने आजाद होकर अपने समाज और राष्ट्र को सम्भाला था ।

स्वाधीनता दिवस या स्वतन्त्रता दिवस हमें यह याद दिलाता है कि हम इसी दिन आजाद हुए थे । सन् 1947 को 15 अगस्त के दिन जिस अंग्रेजी राज्य का कभी भी सूरज नहीं डूबता था, उसी ने हमें हमारा देश सौंप दिया । हम क्यों और कैसे स्वतंत्र हुए, इसका एक सादा इतिहास है । इस देश की आजादी के लिए बार-बार देशभक्तों ने अपने प्राणों की बाजी लगाने में तनिक देर नहीं की ।

स्वतन्त्रता का पूर्ण श्रेय गाँधीजी को ही मिलता है । अहिंसा और शान्ति के शस्त्र से लड़ने वाले गाँधी ने अंग्रेजों को भारत-भूमि छोड़ने के लिए मजबूर कर दिया । उन्होंने बिना रक्तपात के क्रान्ति ला दी । गाँधी जी के नेतृत्व में पं. जवाहरलाल नेहरू सरीखे भी इस क्रान्ति में कूद पड़े । सुभाष चन्द्र बोस ने कहा था, ”तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूंगा ।”

इस प्रकार जनता भी स्वतंत्रता प्राप्ति के लिए  व्याकुल हो उठी । गाँधीजी द्वारा चलाए गये आन्दोलनों से लोगों ने अंग्रेज सरकार का बहिष्कार कर दिया । उन्होंने सरकारी नौकरियाँ छोड़ दीं, जेल गए और मृत्यु को हँसते-हँसते गले लगा लिया । अन्त में खून रंग ले ही आया ।

लेकिन दुर्भाग्य का वह दिन भी आ गया । भारत की दुर्भाग्यलीपि ने भारत के ललाट पर इसकी विभाजक रेखा खींच दी । यथाशीघ्र देश का विभाजन हो गया । हिन्दुस्तान और पाकिस्तान के नाम से भारत महान बंटकर दो भागों में विभाजित हो गया ।

धीरे-धीरे देश का रूप-रंग बदलता गया और आज स्थिति यह है कि अब भी भारत का पूर्णत्व रूप दिखाई नहीं पड़ता है । बलिदान, त्याग आदि को याद रखने के लिए प्रत्येक वर्ष स्वतन्त्रता दिवस (पन्द्रह अगस्त) को बड़ी धूम-धाम से मनाया जाता है ।

देश के प्रत्येक नगरों में तिरंगे झण्डे को लहराया जाता है । अनेक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं । भारत की राजधानी दिल्ली, जहाँ स्वतन्त्रता संग्राम लड़ा गया, स्वतन्त्रता प्राप्ति पर पन्द्रह अगस्त को ऐतिहासिक स्थल लाल किले पर स्वतन्त्र भारत के प्रथम प्रधानमंत्री पं. जवाहरलाल नेहरू ने तिरंगा झण्डा लहराया था ।

इसी भाँति लाल किले पर प्रत्येक वर्ष झण्डा फहराया जाता है । लाखों नर-नारी इस उत्सव में भाग लेते हैं । प्रधानमन्त्री झण्डा फहराने के पश्चात् भाषण देते हैं और स्वतन्त्रता को कायम रखने का सब मिलकर प्रण करते हैं । भारत की राजधानी दिल्ली में यह उत्सव बड़ी धूम-धाम से मनाया जाता है ।

इस दिन लाल किले के विशाल मैदान में बाल-वृद्ध नर-नारी एकत्रित होते हैं । देश के बड़े-बड़े नेता व राजनयिक अपने-अपने स्थानों पर विराजमान रहते हैं । प्रधानमंत्री लाल किले की प्राचीर से राष्ट्रीय ध्वज फहराते हैं । राष्ट्रीय ध्वज को 21 तोपों की सलामी दी जाती है ।

इसके बाद प्रधान मंत्री देश के नाम अपना संदेश देते हैं । इसमें वे राष्ट्र की प्रगति पर प्रकाश डालते हैं और आगे के कार्यक्रम बताते हैं । यह भाषण रेडियो और दूरदर्शन द्वारा सारे देश में प्रसारित किया जाता

है । जय हिन्द के नारे के साथ यह स्वतन्त्रता दिवस समारोह समाप्त होता है । रात्रि में जगह-जगह पर रोशनी होती है । सबसे अच्छी रोशनी संसद भवन और राष्ट्रपति-भवन पर की जाती है ।

स्वाधीनता दिवस के शुभ अवसर पर दुकानों और राजमार्गों की शोभा बहुत बढ़ जाती है । जगह-जगह सांस्कृतिक और सामाजिक कार्यक्रम आयोजित होते हैं, जिससे अत्यन्त प्रसन्नता का सुखद वातावरण फैल जाता है । सभी प्रकार से खुशियों की ही तरंगे उठती-बढ़ती दिखाई देती हैं ।

स्वाधीनता दिवस के शुभावसर पर चारों ओर सब में एक विचित्र स्फूर्ति और चेतना का उदय हो जाता है । राष्ट्रीय विचारों वाले व्यक्ति इस दिन अपनी किसी वस्तु या संस्थान का उद्‌घाटन कराना बहुत सुखद और शुभदायक मानते हैं । विद्यालयों में विभिन्न प्रकार के कार्यक्रमों का आयोजन और संचालन देखने-सुनने को मिलता है ।

प्रातःकाल सभी विद्यालयों में राष्ट्रीय झण्डा फहराया जाता है और ‘जन गण मन अधिनायक जय हे भारत-भाग्य विधाता’ राष्ट्रीय गान गाया जाता है । कहीं-कहीं इन बाल-सभाओं में मिष्ठान वितरण भी किया जाता है ।

ग्रामीण अंचलों में भी इस राष्ट्रीय पर्व की रूप-रेखा की झलक बहुत ही आकर्षक होती है । सभी प्रबुद्ध और जागरूक नागरिक इस पर्व को खूब उत्साह और उल्लास के साथ मनाते हैं । बच्चे तो इस दिन बहुत ही प्रसन्न होते हैं । वे इसे सचमुच में खाने-पीने और खुशी मनाने का दिन समझते हैं ।

हमें चाहिए कि इस पावन और अत्यन्त महत्त्वपूर्ण राष्ट्रीय त्योहार के शुभावसर पर अपने राष्ट्र के अमर शहीदों के प्रति हार्दिक श्रद्धा भावनाओं को प्रकट करते हुए-उनकी नीतियों और सिद्धान्तों को अपने जीवन में उतारने का सत्संकल्प लेकर राष्ट्र निर्माण की दिशा में कदम उठाएं । इससे हमारे राष्ट्र की स्वाधीनता निरन्तर सुदृढ़ रूप में लौह-स्तम्भ-सी अडिग और शक्तिशाली बनी रहेगी ।


3. स्वतंत्रता दिवस-पन्द्रह अगस्त । Essay on Independence Day for Teachers in Hindi Language

स्वतंत्रता दिवस को देश की स्वतन्त्रता का जन्म दिवस भी कह सकते हैं । क्योंकि इसी दिन देश को गुलामी से मुक्ति मिली थी । 1947 से पूर्व लगभग दो सौ वर्षों तक अंग्रेजों ने भारत में राज्य किया । जबकि भारत आदि काल से हिन्दू भूमि रहा है ।

अंग्रेजों से पूर्व करीब बारह सौ वर्षों तक मुगलों ने भारत पर शासन किया । इसके बाद कूटनीति में माहिर अंग्रेजों ने विलासी, भोगी और सत्ता पाने के लिए पारिवारिक षड्‌यंत्रों में उलझे रहे मुगलों को खदेड़ कर अपना शासन भारत में स्थापित किया ।

इनके काल में वैज्ञानिक उन्नति से देश प्रगति पर अग्रसर हुआ । उन्होंने अपनी कूटनीति के चलते भारत से श्रीलंका और बर्मा को अलग कर उन्हें स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में प्रतिष्ठित किया । बंगाल को भी वे दो भागों में विभाजित करने के प्रयास में थे ।

पर जनमत विरोध के कारण इसमें उन्हें सफलता नहीं मिली । इसी दिन दिल्ली के लालकिले पर पहली बार यूनियन जैक के स्थान पर सत्य और अहिंसा का प्रतीक तिरंगा झंडा लहराया गया था । यह राष्ट्रीय पर्व प्रतिवर्ष प्रत्येक नगर में बड़े धूम-धाम से मनाया जाता है । विद्यालयों में छात्र अपने इस ऐतिहासिक उत्सव को बड़े उल्लास और उत्साह के साथ आयोजित करते हैं ।

हमारे स्कूल में भी अन्य वर्षों की भांति इस वर्ष यह उत्सव बहुत ही उत्साह के साथ मनाया गया । स्कूल के सभी छात्र स्कूल के प्रांगण में एकत्रित हुए । यहाँ अध्यापकों ने उपस्थिति ली, जिससे यह मालूम हो गया कि कौन-कौन नहीं आया है । हालांकि कार्यक्रम शुरू होने के बाद भी विद्यार्थियों का आना जारी था ।

उपस्थिति पूर्ण होने के बाद मंच का संचालन कर रहे शिक्षक ने उन छात्रों से आगे आने को कहा जिन्हें कार्यक्रम के लिए चुना गया था । शिक्षक की इस उदघोषणा के बाद कार्यक्रम के लिए चयनित छात्र अन्य छात्रों से अलग हो चुके थे ।

इसके बाद प्रधानाचार्य ने प्रभात फेरी में चलने के लिए विद्यार्थियों को संकेत दिया । स्कूल के छात्र तीन-तीन की पंक्ति बनाकर सड़क पर चलने लगे । सबसे आगे चल रहे विद्यार्थी के हाथ में तिरंगा झण्डा था, उसके पीछे विद्यार्थी तीन-तीन की पंक्तियों में चल रहे थे । सभी छात्र देशभक्ति से ओत-प्रोत गीत गाते हुए जा रहे थे ।

बीच-बीच में अचानक वे ‘भारत माता की जय’, हिन्दुतान जिन्दाबाद-जिन्दाबाद के नारे बुलन्द आवाज में लगा रहे थे । इस प्रकार प्रभात फेरी नगर के प्रमुख चौराहों से होते हुए जिलाधीश के आवास के सामने से निकली । अन्त में प्रभात फेरी स्कूल परिसर में आकर रुकी । जहां ध्वजारोहण की तैयारियां पूरी हो चुकी थी ।

ठीक आठ बजे स्कूल के प्रधानाचार्य ने ध्वजारोहण किया और उपस्थित सभी छात्रों ने तिरंगे को सलामी दी । इस अवसर पर राज्य के शिक्षामन्त्री तथा शिक्षा अधिकारी द्वारा भेजे गये संदेश पढ़कर सुनाए गये । इसके बाद शुरू हुए खेल व सांस्कृतिक कार्यक्रम । सांस्कृतिक कार्यक्रम के तहत जलियांवाला बाग पर आधारित एक नाटक का मंचन किया गया ।

इसके अलावा कुछ छात्रों ने देश भक्ति से ओत-प्रोत अपनी रचनाए सुनाईं । कार्यक्रम के अंत में विभिन्न क्षेत्रों में अव्वल रहे छात्रों को क्षेत्र के प्रमुख समाजसेवी व स्वतंत्रता सेनानी श्री जसवंत सिंह ने पुरस्कार देकर सम्मानित किया । और छात्रों के मध्य मिष्ठान वितरण हुआ ।

राष्ट्रीय स्तर पर इस पर्व का मुख्य आयोजन दिल्ली के लाल किले में होता है । इस समारोह को देखने के लिए भारी जनसमूह उमड़ पड़ता है । लाल किला मैदान व सड़कें जनता से खचाखच भरी होती है । यहां प्रधानमंत्री के आगमन के साथ ही समारोह का शुभारम्भ हो जाता है ।

सेना के तीनों अंगों जल, थल और नौसेना की टुकड़ियां तथा एन.सी.सी. के कैडिट सलामी देकर प्रधानमंत्री का स्वागत करते हैं । प्रधानमंत्री लाल किले की प्राचीर पर बने मंच पर पहुंच कर जनता का अभिनन्दन स्वीकार करते हैं और राष्ट्रीय ध्वज लहराते हैं । ध्वजारोहण के समय राष्ट्र ध्वज को सेना द्वारा इक्कत्तीस तोपों की सलामी दी जाती है ।

इसके बाद प्रधानमंत्री राष्ट्र की जनता को बधाई देने के बाद देश की भावी योजनाओं पर प्रकाश डालते हैं । साथ ही पिछले वर्ष पन्द्रह अगस्त से इस वर्ष तक की काल में घटित प्रमुख घटनाओं पर चर्चा करते

हैं । भाषण के अंत में तीन बार वे जय हिन्द का घोष करते हैं । जिसे वहां उपस्थित जनसमूह बुलन्द आवाज में दोहराता है । लाल किले पर इस अवसर पर रोशनी की जाती है ।


4. हमारे राष्ट्रीय पर्व स्वतंत्रता दिवस | Essay on Our National Festival, Independence Day for School Students in Hindi Language

भूमिका:

पराधीन स्वपनेहु सुख नाहीं की उक्ति प्राणी मात्र पर लागू होती है । पशु-पक्षी आदि प्राणी भी स्वाभाविक रूप से सदैव स्वतंत्र रहकर जीवनयापन करना चाहते हैं । फिर मनुष्य तो सभी प्राणियों में श्रेष्ठ है । वह दूसरे के आधीन रहकर जीवनयापन नहीं कर सकता है ।

पराधीनता के बाद जब किसी को भी स्वतत्रता मिलती है तो उसके आनन्द व हर्ष की कोई सीमा नही होती है । सैकड़ों वर्ष पराधीन रहने के बाद 15 अगस्त, 1947 ई॰ को जब भारत स्वतत्र हुआ, उस समय यहाँ की जनता, नर-नारी, बाल-वृद्ध सभी हर्ष-विभोर हो उठे । तभी से प्रति वर्ष 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस बड़ी धूम-धाम से मनाया जाता है ।

स्वतंत्रता आन्दोलन:

प्रारम्भ से ही समय-समय पर स्वतंत्रता के लिये संघर्ष होते रहे, लेकिन वे प्रयास पूर्ण सफल नहीं हो पाये । 1857 ई॰ में हुए आन्दोलन को प्रथम स्वतत्रता संग्राम कहा जाता है । इसमे महारानी लक्ष्मी बाई, नाना साहब, तांत्य टोपे, बहादुर शाह जफर, मगल पाण्डे आदि का त्याग व बलिदान उल्लेखनीय है ।

उसके बाद 1885 ई॰ में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना की गयी । इस संगठन के माध्यम से लक्ष्य प्राप्ति तक निरंतर संघर्ष चलता रहा जिसमे अनेक भारतीय सपूतो के त्याग, तपस्या व बलिदान की अमर कथाएँ जुड़ी हैं ।

इस देश को स्वतंत्र कराने के लिये जहाँ एक ओर महात्मा गाँधी के नेतृत्व में अहिंसात्मक शान्ति पूर्ण आन्दोलन चल रहा था वही दूसरी ओर वीर भगतसिंह, चन्द्रशेखर आजाद, शहीद राम प्रसाद विस्मिल, नेताजी सुभाषचन्द्र बोस, आत्म बलिदान द्वारा क्रान्ति का संचालन कर रहे थे जिसमें भारत माँ के अनेक सपूत शहीद हुए । उक्त दोनों नरम दल व गरम दल के अथक प्रयासों से ही हमें सैकड़ों वर्षो के बाद स्वतंत्रता मिली ।

लक्ष्य प्राप्ति व राष्ट्रीय पर्व:

वर्षों की ठण्डी व गरम लड़ाई के बाद 15 अगस्त, 1947 ई॰ को हम स्वतंत्र हो गये । प्रथम स्वतंत्रता दिवस हमने उन स्वतंत्रता सेनानियो के साथ मनाया जिन्होने देश को स्वतत्र कराने के लिये अभूतपूर्व त्याग किया था । उस दिन हमारे स्वतंत्र भारत, हमारे वर्तमान भारत, हमारे नये भारत का जन्म हुआ था । उसी जन्म-दिवस को हम प्रति वर्ष मनाते आ रहे हैं ।

स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर: स्वतंत्रता दिवस की पूर्व सध्या पर अर्थात् 14 अगस्त की रात्रि को देश का राष्ट्रपति देश के नाम अपना संदेश प्रसारित करता है जिसको सचार मा ध्यमो से सर्वत्र प्रसारित किया जाता है । अपने संदेश में वह सरकार की उपलब्धियो व भावी जन-आशाओ व आकांक्षाओं पर प्रकाश डालता है । जनता अपने राष्ट्रपति के सदेश को बड़े ध्यान से सुनती है ।

स्वतंत्रता दिवस राष्ट्रीय स्तर पर मनाने की परम्परा:

भारत सरकार प्रति वर्ष इस पावन पर्व को देश की राजधानी दिल्ली मे बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाती है । उसकी तैयारी राष्ट्रीय स्तर पर कई दिन पहले से ही आरम्भ हो जाती है । 15 अगस्त को प्रात: लगभग 7 बजे देश के प्रधानमत्री दिल्ली के ऐतिहासिक लाल किले की प्राचीर पर राष्ट्रीय ध्वज फहराते हैं ।

गगन भेदी तोपो की गूँज के साथ इस पावन पर्व का शुभारम्भ होने के पश्चात् वे देश के नाम सन्देश देते हैं जिसको आकाशवाणी व दूरदर्शन के सभी केन्द्रो द्वारा प्रसारित किया जाता है । अपने सन्देश में प्रधानमंत्री स्वतंत्रता दिवस के महत्त्व को बताते हुए अपनी सरकार की उपलब्धियो व नीतियों पर प्रकाश डालते हैं ।

दिल्ली के विद्यालयो में:

चूकि इस पर्व को 15 अगस्त के दिन दिल्ली में राष्ट्रीय स्तर पर मनाया जाता है इस कारण दिल्ली के विद्यालयो मे इसको एक दिन पूर्व अर्थात् 14 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस की पूर्व पावन बेला को, बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है ।

सभी छात्र विद्यालय में बड़े उल्लास के साथ इस पर्व में सम्मिलित होते हैं । सर्वप्रथम विद्यालय के प्रधानाचार्य राष्ट्रीय गीत के साथ ध्वजारोहण करते हैं, फिर छात्रों की ओर से विभिन्न कार्यक्रम प्रस्तुत किये जाते है ।

कई छात्र देश-भक्ति के गीत गाते हैं, कई व्याख्यान देते हैं और कई विभिन्न प्रकार के नाटक व प्रहसन प्रस्तुत करते हैं । फिर खेल-कूद का आयोजन होता है । अन्त में पुरस्कार वितरण करके राष्ट्रीय गीत के साथ कार्यक्रम का समापन किया जाता है ।

स्वदेश व विदेश में:

देश की प्रान्तीय राजधानियों में राज्यपाल व मुख्यमंत्री ध्वजारोहण के साथ इस कार्यक्रम का शुभारम्भ करते है । सभी सरकारी कार्यालयों, विद्यालयों व कालेजों में वहाँ के मुखियों द्वारा ध्वाजारोहण किया जाता है। विदेशों में भी यह पर्व बड़े उल्लास से मनाया जाता है ।

प्रत्येक देश में भारत के आवासों में ध्वजारोहण के साथ कार्यक्रम का शुभारम्भ किया जाता है । प्रत्येक देश के शासनाध्यक्ष भारत को बधाई संदेश भेजते हैं ।

उपसंहार:

हमारा यह राष्ट्रीय पर्व धर्म-निरपेक्ष राष्ट्रीय भावना से मनाया जाता है । यह देश के सभी धर्मो, जातियों, सम्प्रदायों एवम् क्षेत्रों के लोगो द्वारा हार्दिक प्रसन्नता के साथ मनाया जाता है । इसमें किसी प्रकार की भेद भावना निहित नही है ।

हम इस पावन पर्व को सदैव युगों-युगो तक मनाते रहें यही हमारी कामना है । देश की रक्षा के लिये समस्त देशवासियो को निहित स्वार्थ को त्याग कर सदैव कटिबद्ध रहना चाहिये । जय हिन्द !


5. स्वतंत्रता-दिवस | Essay on Independence Day for Teachers in Hindi Language

15 अगस्त भारतवर्ष का एक राष्ट्रीय त्यौहार है । 15 अगस्त, 1947 का दिन भारत देश के इतिहास में स्वर्णाक्षरों से लिखा गया है । इस शुभ दिन हमारा देश सैकड़ों वर्षों की अंग्रेजी पराधीनता से स्वतंत्र हुआ था । तभी से भारत के करोड़ों नागरिक इस त्यौहार को ‘स्वतंत्रता-दिवस’ के रूप में बड़े हर्षोल्लास से मनाते हैं ।

इस अवसर पर सभी विद्यालय, कार्यालय, कारखाने, संस्थान और बाजार बन्द रहते हैं । इस दिन प्रत्येक वर्ष भारतवर्ष की राजधानी दिल्ली में लालकिले की प्राचीर पर प्रधानमंत्री राष्ट्रीय ध्वज फहराते हैं तथा देशवासियों के नाम सन्देश देते हैं । राष्ट्रीय ध्वज को 21 तोपों की सलामी दी जाती है, तत्पश्चात् राष्ट्रगान होता है ।

ADVERTISEMENTS:

स्वतंत्रता तथा समृद्धि का प्रतीक यह दिवस भारत के कोने-कोने में बड़ी धूम-धाम से मनाया जाता है । 15 अगस्त की सुबह राष्ट्रीय स्तर के नेतागण पहले राजघाट आदि समाधियों पर जाकर महात्मा गांधी आदि राष्ट्रीय नेताओं तथा स्वतंत्रता-सेनानियों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं फिर लाल किले के सामने पहुंच कर सेना के तीनों अंगों (वायु, जल व स्थल सेना) तथा अन्य बलों की परेड का निरीक्षण करते हैं तथा उन्हें सलामी देते हैं ।

15 अगस्त को सभी सरकारी कार्यालयों पर राष्ट्रीय ध्वज फहराया जाता है तथा सभी लोग अपने घरों व दुकानों पर राष्ट्रीय-ध्वज फहराते हैं । इस दिन रात्रि के समय सरकारी कार्यालयों व अनेक विशेष स्थानों पर विद्युत-प्रकाश किया जाता है ।

इसकी सुन्दरता के कारण भारत की राजधानी दिल्ली एक नव वधू सी लगने लगती है । सभी स्कूलों व कॉलेजों में यह पर्व एक दिन पूर्व अर्थात् 14 अगस्त को ही मना लिया जाता है । इस दिन स्कूलों में बच्चों को फल, मिठाइयां आदि वितरित की जाती हैं ।

15 अगस्त भारत के गौरव व सौभाग्य का पर्व है । यह पर्व हम सभी के हृदयों में नवीन स्कूर्ति, नवीन आशा, उत्साह तथा देश-भक्ति का संचार करता है । यह स्वतंत्रता-दिवस हमें इस बात की याद दिलाता है कि इतनी कुर्बानियां देकर जो आजादी हमने प्राप्त की है, उसकी रक्षा हमें हर कीमत पर करनी है ।

चाहे हमें उसके लिए अपने प्राणों की आहुति ही क्यों न देनी पड़े । इस प्रकार पूरी उमंग और उत्साह के साथ इस राष्ट्रीय पर्व को मनाकर हम राष्ट्र की स्वतंत्रता तथा सार्वभौमिकता की रक्षा का प्रण लेते हैं ।


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