आधुनिक तकनीक भारतीय ग्रामीण जीवन को किस प्रकार रूपान्तरित कर सकती है पर निबन्ध!

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भारत की ‘आत्मा और हृदय’ गाँवों में बसते हैं । इसमें कोई आश्चर्य नहीं कि भारत की लगभग 70 प्रतिशत जनसंख्या गाँवों में रहती है । लेकिन पिछले कुछ दशकों से भारतीय गाँवों की स्थिति में आमूल परिवर्तन-रूपान्तरण दृष्टिगत होता है । यह रूपान्तरण अपने में कुछ गुणों और अवगुणों को लिए हुए हैं ।

इस तीव्र गति से परिवर्तन का मुख्य श्रेय आधुनिक तकनीक को जाता है । भारत में आधुनिक तकनीक विभिन्न विकास के क्षेत्रों जैसे, विज्ञान, उद्योग, कृषि में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करती है । भारतीय गाँवों के जीवन तंत्र में आधुनिक तकनीकी विकास का गहरा प्रभाव दृष्टिगत होता है ।

कृषि भारतीय गाँवों की अर्थव्यवस्था की रीढ़ की हड्‌डी है । आधुनिक तकनीक की सहायता से कृषि के तरीकों में क्रांतिकारी परिवर्तन आ गया है । किसानों ने इनकी उपयोगिता को समझ कर परम्परा से चले आ रहे यंत्रो को छोड़ नए कृषि यंत्रों और उत्पादन प्रणालियों का प्रयोग प्रारंभ कर दिया है । ट्रैक्टर आदि आधुनिक यंत्रों के उपयोग से कृषि कला में सुधार आया है और उसे व्यापारिक स्तर प्राप्त हुआ है ।

इससे औसत भारतीय किसान के जीवन-स्तर में उन्नति हुई है । कृषि में यंत्रों के प्रवेश से किसानों के शारीरिक श्रम का भार कम हो गया है तथा अतिरिक्त आय प्राप्ति के लिए उसने कृषि से संबंधित अन्य पेशों जैसे पशु पालन, मुर्गीपालन आदि की ओर अपना ध्यान केन्द्रित करना प्रारंभ कर दिया है, विस्तृत कृषि, गहन कृषि, मिश्रित कृषि, स्थानांतरित कृषि और ‘हरित क्रांति’ के कारण विश्व में भारतीय किसानों की छवि सम्माननीय बन गई है ।

पहले, बीजों और फसल का रोपण, कटाई आदि के लिए भारतीय किसानों को भारी श्रम करना पड़ता था । वह पूर्णत: वर्षा पर निर्भर रहता था । आधुनिक तकनीकों की खोज के कारण कृत्रिम सिंचाई के कई साधन जैसे ट्‌यूबवैल, नहर, बांधो आदि से किसानों की दयनीय दशा में भारी सुधार आया है । उन्नत किस्म के बीज और खाद आधुनिक तकनीक के अन्य अच्छे परिणाम है, इसी कारण आज भारत खाद्यान्न के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बन गया है ।

यहाँ तक कि अब वह अन्य देशों को खाद्यान्न का निर्यात भी करता है । अच्छे किस्म के बीजों और खाद के प्रयोग का फसलों पर पर्याप्त प्रभाव पड़ता है, इसलिए सरकार गरीब किसानों को इन्हें आसान दरों पर उपलब्ध कराने की ओर सराहनीय प्रयास कर रही है ।

कुछ दशक पहले तक गाँवों में बिजती की व्यवस्था नहीं थी । लेकिन आधुनिक आविष्कारों से कम खर्चीली विद्युत व्यवस्था से कई गाँवों में बिजली की सुविधा उपलब्ध कराई गई है । आज कुछ गाँवों में तो टेलीविजन संचार केन्द्रों की स्थापना भी हो गई है । गाँवों में संचार सेवाएं भी पहुँच गई हैं ।

अच्छी सड़कों और रेलमार्गो के निर्माण से गाँव नगरों एवं शहरों से करीब आ गए है । प्राचीन काल में किसान के पास परिवहन का एकमात्र साधन, बैलगाड़ी थी लेकिन आज प्रत्येक गाँव में टूक, बस, गाड़ी आदि नजर आते हैं । डाक एवं तार प्रणाली ने गाँवों को नवीन रूप प्रदान किया है ।

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लेकिन गाँव और गाँव के जीवन में आधुनिक तकनीक के कुछ बुरे प्रभाव भी पड़े हैं । आधुनिक तकनीक से मशीन पर आधारित जीविकाओं में बढ़ोत्तरी हुई हैं, आकर्षक वेतन और अन्य सुविधाओं के कारण गाँव के युवकों का शहरों की ओर पलायन हो रहा है । गाँव में छूटे अपने संबंधियों से उनके संबंध समाप्त होते जा रहे हैं । भारतीय गाँव अब आत्मनिर्भर इकाई नही रह गए हैं ।

सूई से लेकर हवाई जहाज का निर्माण मशीनों पर आधारित होता है । गाँव के शिल्पकार, कुम्हार, कलाकार आदि जीविकाहीन हो गए है । साथ ही आधुनिक तकनीक से कृषि का फायदा धनी वर्ग के किसानों को ही होता है, गरीब किसानों के लिए उन्हें प्राप्त करना असंभव है । इस कारण गाँवों में भी धन के असमान वितरण की स्थिति उत्पन्न हो गई है ।

तथापि, जब हम भारतीय गाँवों में आधुनिक तकनीक की असुविधाओं और दोषों का आकलन करते हैं, तो यह दृष्टिगत होता है कि इसके माध्यम से भारतीय गाँवों की स्थिति में सुधार आया है । भारतीय गाँवों को सशक्त आर्थिक, सामाजिक और राजनैतिक आधारभूमि और नवीन आयाम प्रदान करने में निश्चित रूप से आधुनिक तकनीक का महान योगदान है ।

आज गांववासियों का जीवन नए लक्ष्यों और नई आशाओं से भरा हुआ है, इसका मुख्य कारण यह है कि वे शिक्षित हैं । शिक्षा की वजह से ही आज किसान नई और विकसित प्रणालियों का प्रयोग कृषि और अन्य उद्योग- धन्धों में कर रहे हैं ।

भारत की अधिकांश जनता गाँव में रहती है । आधुनिक तकनीक के कारण गाँवों की स्थिति में सुधार आया है और उसके कारण गाँववासियों का जीवन रूपान्तरित हो गया है । निस्संदेह आज के किसान का जीवन स्तर 17वीं या 18वीं सदी के किसान से अच्छा है । यह सब आधुनिक तकनीक का ही परिणाम हैं ।

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