Hindi Story on a Foolish Friend is a Problem for Ever (With Picture)!

मूर्ख की दोस्ती जान का जंजाल |

एक चूहा था । वह नदी के किनारे रहता था । वहां रहते हुए उसकी मित्रता एक मेढक से हो गई । उनकी मित्रता बहुत गहरी हो गई । एक दिन दोनों आपस में बात कर रहे थे । ”भाई चूहे, इस नदी के किनारे कई कारखाने बन गए हैं । उनकी गंदगी नदी में आती है । जिससे नदी का पानी गंदा हो गया है । खाने-पीने में बड़ा कष्ट होता है ।”

मेढक ने कहा । ”सही कहते हो मित्र! अब पहले जैसी सुविधा यहां नहीं रही ।” ”हमें किसी अन्य स्थान पर चलना चाहिए । इस नदी के पार पहाड़ हैं । पहाड़ के पीछे एक सरोवर है । उस सरोवर का जल स्वच्छ और मीठा है । हमें वहीं चलना चाहिए ।” मेढक ने सुझाव दिया । ”सुझाव तो तुम्हारा बहुत अच्छा है मित्र! चलो चलते हैं ।”

”परन्तु मित्र, यह नदी मुझसे तो पार न हो सकेगी ।” चूहा बोला । ”घबराते क्यों हो मित्र? तुम मेरी पीठ पर चढ़ जाओ मैं तैरकर तुम्हें उस पार पहुंचा दूंगा ।” ”ठीक है, ऐसा ही करते हैं ।” चूहा एक धागा ढूंढ लाया । उसका एक छोर उसने अपनी पीठ पर बांधा दूसरा छोर मेढ़क की पीठ पर बांधा । फिर कूदकर मेढक की पीठ पर चढ़ गया । मेढक तैर रहा था । चूहे को उसकी सवारी करने में आनन्द आ रहा था । वह उसकी पीठ पर नाचने लगा ।

मेढक को यह बात पसंद नहीं आई । वह उसे मजा चखाने की सोचने लगा । उसने पानी के भीतर डुबकी लगाई, चूहा पानी में डूब गया । वह बुरी तरह भीग गया । पानी बहुत ठंडा था । चूहा सर्दी से कांपने लगा । ”यह क्या करते हो मित्र! मारोगे क्या?” चूहा बोला ।

मेढक को मजा आ रहा था । वह बार-बार डुबकी मारता । चूहा बचाव के लिए हाथ-पैर मारने लगा । चूहा बुरी तरह घबरा रहा था । उन दोनों की इस खींचतान से पानी में हलचल होने लगी । उसी समय एक चील उड़कर जा रही थी ।

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उसने उस हलचल पर ध्यान दिया, उसे तुरंत चूहा नजर आ गया । चील ने झपट्टा मारकर चूहे को दबोच लिया । वह उसे लेकर उडी । चूहे की पीठ से बंधे धागे से मेढक भी बंधा था । वह भी लटकता हुआ पानी से ऊपर आ गया । चील एक साथ दो शिकार पाकर बड़ी प्रसन्न थी ।

”हाय! इस मूर्ख मेढक ने मेरे प्राण संकट में फंसाए, अपने भी फंसाए ।” चूहा रोते हुए बोला- ”मैंने मूर्ख से दोस्ती की । उसी का यह परिणाम है ।” ”अबे, चूहे के बच्चे, तेरे कारण मैं मर गया ।” मेढक गुर्राकर बोला- ”यदि यह धागा न होता तो, मैं तो बच जाता ।”

”मित्रता समान स्वभाव वाले से करनी चाहिए ।” तब चील ने कहा- ”तुम दोनों की मित्रता असंगत थी । आओ, तुम्हें सभी कष्टों से मुक्त कर दूं । मेरे पेट में भी गुड़-गुड़ हो रही है ।” चील दोनों को खा गई । इस तरह अपनी मूर्खता से दोनों मारे गए ।

सीख:

बच्चो! हमें अपने स्वभाव वाले से ही मित्रता करनी चाहिए । भिन्न स्वभाव का मित्र हमारा साथ नहीं दे सकता । उल्टे हमें मुसीबत में फंसा सकता है । इसीलिए कहा गया है, मूर्ख की दोस्ती जान का जंजाल ।

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