वर्षा के कारण स्कूल की छुट्टी का दिन पर अनुच्छेद | Paragraph on Rainy Day at School in Hindi

प्रस्तावना:

पिछले वर्ष जुलाई के तीसरे सप्ताह में खूब पानी बरसा । लगभग हर दिन वर्षा की झड़ी लगी रही । लेकिन मुझे बड़ा आश्चर्य होता था कि हर दिन प्रात: छ: बजे वर्षा बन्द हो जाती थी ।

हमारा स्कूल साढ़े छ: बजे से लगता है । इसलिये मुझे बेमन से स्कूल जाना पड़ता था । मैं बराबर ईश्वर से प्रार्थना करता रहता था कि प्रात: काल घनघोर वर्षा हो, ताकि स्कूल में छुट्‌टी हो जाये । महीने के अन्तिम दिन ईश्वर ने मेरी प्रार्थना सुन ली । 30-31 जुलाई की सारी रात भीषण वर्षा होती रही । सुबह हुई लेकिन तब भी वर्षा लगातार होती रही ।

स्कूल के समय भारी वर्षा:

उस दिन थोड़ी-सी किताबें हाथ में लिए छाता लगाकर मैं रकूल पहुंचा । मुझे यह देखकर बडी प्रसन्नता हुई कि स्कूल में बहुत कम लड़के आए थे । प्रिंसिपल ने वर्षा के कारण उस दिन छुट्‌टी घोषित कर दी । हम बड़े प्रफुल्लित मन से स्कूल से निकल आए ।

अपने कुछ सहपाठियों के साथ मैंने कम्पनी गार्डन जाने का कार्यक्रम बनाया । कम्पनी गार्डन पहुँचकर हम सभी ने अपनी-अपनी पुस्तकें छाते के नीचे ईंटो पर रख दीं और हम सभी गार्डन में खेलने लगे । कोमल घास पर हम लोगों ने खूब लोट-पोट लगाई । हमारे कपड़े कीचड़ से बुरी तरह खराब हो गये । लगभग एक घटे के बाद हम लोग गार्डन के बाहर आ गए ।

रास्ते के दृश्य:

अब हम सड़क पर निकल आए । वर्षा अभी भी हो रही थी । सडकों पर पानी भरा था और समूचा यातायात ठप्प हो गया था । रास्ते के दोनों ओर के दृशयों को देखकर हम आनन्दित हो रहे थे । सडकों पर घुटनों तक पानी भरा हुआ था । कुछ बच्चे उस पानी में खेल रहे थे और कुछ दूसरे बच्चे कागज की नाव बनाकर पानी में डाल रहे थे ।

पानी में तैरती हुई कागज की छोटी-छोटी नावें बड़ा लुभावना दृश्य प्रस्तुत कर रही थीं । नालों मे छोटी-मोटी नदियों की भांति पानी बह रहा था । इन दृशयों को देखकर हम इतने प्रसन्न हुए कि हमने समूचा दिन खुले मे बिताने का फैसला कर लिया ।

शहर का दृश्य:

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वर्षा के प्राकृतिक दृश्यों को देखने के लिए हमने शहर की सडकों पर चक्कर लगाये । सड़क के किनारों के पेड़ वर्षा से धुल गए थे । उनकी हरी और कोमल लहराती हुई पत्तियों और डालों के दृश्य ने हमे मोह लिया । मेढ़कों की तेज टरटराहट ने हमारा ध्यान आकर्षित किया । हमने मेढ़क पकड़ने का कई बार प्रयास किया, लेकिन वह बड़ी तेजी से हमारे से फिसल जाते थे ।

चारों ओर घनघोर घटा छाई हुई थी । काले-काले बादलों ने सूरज कों ढक लिया था । दोपहर के समय शाम के धुँधलके का दृश्य दिखाई दे रहा था । अपने-अपने जूते हाथ मे लिए हम वर्षा के गंदले पानी के बीच चलते रहे ।

चौक का आकर्षण:

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अन्त में हम चौक पहुंच गए । यह शहर मुख्य बाजार है । वही कुछ समय के लिए हम रुक गए । कीचड़ के कारण सडकों पर बड़ी फिसलन थी । यह दृश्य बड़ा अनूठा था । बार-बार सड़क पर कोई-न-कोई फिसल जाता था ।

हम उन्हें फिसलता देखकर खूब हंसते थे । कार और बसें पानी के बीच से बड़ी तेजी से गुजर जाती थीं । उनके गुजरते समय लोगों पर ढेर-सा कीचड़ और पानी गिर पड़ता था जो उन्हें सिर से पैर तक सराबोर कर देता था ।

उपसंहार:

दोपहर के बाद हमें भूख सताने लगी । अपनी भूख मिटाने के लिए हमने कुछ आम खरीदे । आम खाते-खाते हमने तरह-तरह की शरारत कीं । इसके बाद कुछ समय हमने एक-दूसरे पर पानी उछाल कर खूब आनन्द मनाया । रास्ते में एक बूढ़े आदमी को हमने खूब चिढ़ाया । जब वह खीझ गया, तो हमने शरारत बन्द कर दी और वापस घर लौट आए । वर्षा का यह दिन हम जीवनभर न भूल पायेंगे ।

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