सड़क के एक नल पर प्रातःकालीन दृश्य पर अनुच्छेद | Paragraph on A Morning Scene at a Street Water Tap in Hindi

प्रस्तावना:

बड़े शहरों और कस्बों में निवासियों के लिए जल की व्यवस्था नगर पालिकायें करती हैं । अधिकांश मकानों के भीतर नल होते हैं । ये नल उन मकान वालों के निजी नल होते हैं, जिनसे मकान के लोग ही पानी ले सकते हैं । बहुत-से मकानो के भीतर नल नहीं होते ।

इन मकानों में अधिकाश गरीब लोग रहते हैं, जो नल लगाने का व्यय नहीं उठा सकते । ऐसे लोगों की सुविधा के लिए थोड़ी-थोड़ी दूर पर सड़को पर नल लगाये जाते है । ये सार्वजनिक नल होते हैं । इनका इस्तेमाल कोई भी जरूरतमन्द व्यक्ति कर सकता है । गर्मियों में इन नलों पर कभी-कभी भारी भीड़ दिखाई पड़ती है ।

नल में पानी आने से पूर्व की स्थिति:

सड़क के नलों में प्रात: 6 बजे पानी आना शुरू होता है । इसके काफी पहले से लोगों को बालिया, घड़े और मटके उठाए नलों की ओर लपकते देखा जाता है । वे जल्दी-से-जल्दी बाल्टी या घड़े को पानी लेने वालों की लाइन मे लगा देते हैं, ताकि नल आने पर उन्हें जल्दी पानी मिल जाये ।

कुछ लोग अपने बर्तन नम्बर पर लगाकर घरों में लौट कर कुल्ला-दातुन आदि करके लौट आते हैं और कुछ लोग वहीं खड़े आपस में बातचीत करने लगते है । ऐसे समय में सभी तरह की बाते होती हैं । कोई महगाई का रोना रोता है और कोई अपनी बहू का या सास का । कहीं-कहीं सरकार को लेकर टीका-टिप्पणी होती है ।

पानी आने के बाद का दृश्य:

नलों में पानी आने के पूर्व सूं-सूं की आवाज आते सब लोग बातचीत छोड़ अपने-अपने बर्तनों के पास आ जाते है । वे एक के बाद एक अपने सभी बर्तनों में पानी भर लेने के बाद दूसरे व्यक्ति को पानी भरने देते हैं । कभी-कभी कुछ लोग पानी भरने की जल्दी मचाते हैं, जिसे लेकर झगड़ा होने लगता है ।

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एक बार तो दो औरतों में बड़ी गाली-गलौच हुई और इसके बाद उनमें हाथापाई होने लगी । बड़ी कठिनता से उन्हें अलग कराया जा सका । दोनों के मुह पर नाखूनों की खरोंचें लगी थीं, जिनमें खून झलक रहा था । दोनों के मटके फूट चुके थे और वे अभी तक एक-दूसरे का बुरा-भला कहकर अपनी बेबसी पर ऑसू बहा रही थीं ।

हर आदमी को पानी भरने को जल्दी विशेष रूप से इसलिए भी होती है कि इस बात का पक्का भरोसा नहीं होता कि नल में कब तक पानी आयेगा । यों तो दस बजे के बाद पानी बन्द होता है और तब तक सभी लोग बडी आसानी से पानी भर सकते है, लेकिन गर्मियों मे अक्सर समय से एक-डेढ़ घटा पहले ही पानी बन्द हो जाता है ।

अपना-अपना पानी भरने के बाद नल पर नहाने और कपडे धोने वालों का नम्बर लग जाता है । स्त्री और पुरुष तथा बच्चे सभी खुले में नहाते दिखाई पड़ते हैं । पास में ही कुछ लोग कपडों पर साबुन लगा कर उन्हें मल लेते हैं और नल खाली होने पर धोकर ले जाते है ।

पानी बन्द हो जाने पर:

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नल का पानी बन्द हो जाने पर जो लोग पानी भरने या नहाने की प्रतीक्षा में खड़े होते हैं, वे बड़े निराश होते हैं । कभी-कभी साबुन लगाने के तुरन्त बाद पानी बन्द हो जाता है और उन्हें साबुन लगे-लगे ही घर जाना पडता है । कुछ देर प्रतीक्षा करके निराश होकर लोग घर लौट जाते हैं और शाम को नल आने का इन्तजार करते हैं ।

उपसंहार:

सड़क के नल उन लोगों के लिए वरदान हैं- जो पैसे की कमी के कारण घरों में निजी नल नहीं लगवा पाते । इन नलों मे पानी की अकनर बहुत बरबादी होती है । अपना काम समाप्त करने के बाद लोग प्राय: नल ठीक से बन्द नहीं करते । अक्सर नलों की टोटियों खराब होती हैं, जिनसे बराबर पानी बहता रहता है । नगर पालिकाओं को इस ओर विशेष ध्यान देना चाहिए ।

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