रेलवे स्टेशन का दृश्य पर निबन्ध | Essay on Scene of a Railway Station in Hindi!

1. भूमिका:

रेलगाड़ी और रेलवे स्टेशन आज जीवन के अंग बन चुके हैं । ऐसा कोई व्यक्ति न होगा जिसने ये दोनो चीजे नहीं देखी होंगी । बसों और बड़ी संख्या में हवाई जहाजों (Aeroplane) तथा आने-जाने के दूसरे कई साधन (Means) होने के बावजूद रेलगाड़ियों का उपयोग (Utility) कम नहीं है । इसीलिए रेलवे स्टेशन का दृश्य (Scene) भी बार-बार हमारी आँखों के सामने आ ही जाता है ।

2. अच्छाइयाँ:

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रेलवे स्टेशन शहरों (Towns) और महानगरों (Metropolitan Cities) में कुछ अरि धक भीड़ (Crowd) वाले होते हैं क्योंकि वहाँ आबादी (Population) भी अरि धक होता है और व्यापारिक कार्य (Commercial Activities) भी अधिक होते हैं जबकि गाँवों (Villages) में रेलवे स्टेशन कम भीड़ वाले होते हैं ।

पिछले दिनों मुझे गुवाहाटी के रेलवे स्टेशन का दृश्य देखने को मिला । मैं अपने माता-पिता के सा थ बस्मपुत्र मेल द्वारा कानपुर से गुवाहाटी आया था । प्लेटफॉर्म पर उतरने के बाद मैंने देखा कि यहाँ दिल्ली मुम्बई या कानपुर जैसी भीड़ नहीं थी बल्कि समूचा वातावरण (Environment) अपेक्षाकृत (Comparatively) शांत था ।

अन्य प्लेटफॉर्मों पर भी गाड़ियों की प्रती क्षा में बैठे और खड़े हुए यात्री अत्यंत आश्वस्त (Comfortable) दिखाई पड़ रहे थे । कहीं भाग-दौड़ या कुलियों अथवा टिकट जाँचने वाले कर्मचारियों की सौदेबाजी देखने को नहीं मिली ।

3. कठिनाइयाँ:

अन्य रेलवे स्टेशनों से कुछ अलग दीखने वाले गुवाहाटी रेलवे स्टेशन पर कुछ असुविधाएँ भी हैं । प्लेटफॉर्मों के आसपास की गंदगी के अलावा प्लेटफॉर्मों पर बैठने के स्थान की कमी, प्रसाधन गृह (Toilet) की कमी, पूछताछ (Enquiry) कर्मचारी की लापरवाही (Negligence) तथा प्रतीक्षा कक्ष (Waiting Rooms) की अव्यवस्था इत्यादि अनेक दृश्य इस स्टेशन पर भी खुलेआम (Openly) देखे जा सकते हैं ।

4. उपसंहार:

स्टेशन से निकलने के बाद ऐसा प्रतीत हु आ जैसे एक अव्यवस्थित वातावरण (Unmanaged Environment) से निकलकर अपनी दुनिया में आ गए हों ।

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