गुवाहाटी देखने के लिए मामाजी को बुलावा पत्र |

गुवाहाटी

20 अप्रैल 2003

आदरणीय मामाजी,

सादर प्रणाम ।

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आपका पत्र मिला । यह जानकर मुझे बड़ी प्रसन्नता हुई कि आप इस बार गर्मी की छुट्‌टियों में गुवाहाटी देखने आना चाहते हैं । इस वर्ष इन छुट्‌टियों में मेरा भी कहीं जाने का मन नहीं था क्योंकि छुट्‌टियाँ खत्म होते ही अर्द्ध वार्षिक परीक्षाए (Half Yearly examination) शुरू हो जाएगी ।

इसीलिए यह अच्छा रहेगा कि मैं छुट्‌टियों का उपयोग पढ़ने-लिखने में । आपके आने से पढ़ने-लिखने के अलावा कुछ घूमना-फिरना भी हो जाएगा और मन बहल जाएगा । मामाजी, आपके लिए भी गुवाहाटी का भ्रमण एक अच्छा अनुभव रहेगा क्योंकि पिछले कुछ वर्षों से गुवाहाटी के रूप-रंग में अनेक परिवर्तन हुए हैं । यहाँ कामाख्या मंदिर, दौल गोविन्द, नवग्रह, वशिष्टाश्रम आदि अनेक तीर्थस्थान भी हैं जिन्हें देखकर आप अवश्य प्रसन्न होंगे । शेष कुशल है ।

आपके आगमन की प्रतीक्षा में,

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आपका प्रिय

‘क’

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