अंतरिक्ष में क्रान्तिकारी उपलब्धियाँ पर निबन्ध | Paragraph on India’s Revolutionary Achievement in Space in Hindi

स्पेन में एक बडी दूरबीन स्थापित की गई है, जिससे सूर्य पर बड़े-बड़े धब्बों का रहस्य समझा जा सकेगा । सूर्य और तारों की गतियों का निरीक्षण करने के लिए स्पेन ने नारी द्वीप पर रॉयल स्वीडिश अकादमी आफ साइन्स द्वारा एक मीटर व्यास वाली दूरबीन की स्थापना एक सुसुप्त ज्वालामुखी के मुहाने पर की गई है । इस दूरबीन के जरिए पृथ्वी पर से सूर्य को सबसे बडे रूप में देखा जा सकेगा ।

अंतरिक्ष में नई ‘जेम्स देव’ दूरबीन की योजना 1996 में अंतरिक्ष में स्थापित ‘हब्बल’ की तर्ज पर स्थापित करने की नासा की योजना है । इसके निर्माण के लिए कैलीफोर्निया की TRWINC के नेतृत्व वाले एक गठबंधन का चयन नासा ने किया है । इसके लिए 82.48 करोड़ डॉलर का अनुबंध इस गठबंधन के साथ नासा ने किया है ।

नए जेम्स वेब टेलीस्कोप को 9.40 लाख मील (15 लाख किमी.) ऊपर अंतरिक्ष में ‘लैगरेंज पाइंट-2’ क्षेत्र में स्थापित किया जायेगा । इसका प्रक्षेपण 2010 में करने की नासा की योजना है । प्रक्षेपण के पश्चात् अपने निर्धारित स्थान पर पहुँचने में तीन माह का समय ‘जेम्स वेब’ दूरबीन को लगेगा । इस दूरबीन की मरम्मत का कार्य कमाडर स्कॉट एल्टमैन के नेतृत्व में सात अन्तरिक्ष यात्रियों के दल ने मार्च 2002 में सम्पन्न किया ।

पृथ्वी के निकट से गुजरे दो एस्टेरॉयड एन वाई 40 हाल ही में खोजा गया एक क्षुद्रग्रह 2002 NU-40, 18 अगस्त, 2002 को पृथ्वी के इतने निकट से गुजरा कि किसी छोटी दूरबीन की सहायता से भी इसे देखा जा सका । इस घटना के छ: माह के भीतर 2002 एए 29 नाम का 60 मीटर के आकार का एक क्षुद्रग्रह 6 जनवरी, 2003 को पृथ्वी के लगभग 60 लाख किलोमीटर दूरी से गुजरा । वैज्ञानिकों के अनुसार इस एस्टेराइड के भविष्य में पृथ्वी के छोटे उपग्रह के रूप मे परिणित होने की सम्भावना है ।

पृथ्वी की परिक्रमा कक्ष से गुजरते हुए ऐसे क्षुद्रग्रह कभी पृथ्वी से टकरा भी सकते है । ऐसी स्थिति में पृथ्वी पर तबाही मच सकती है । अरबों वर्ष पूर्व पृथ्वी पर डायनासोरों की समाप्ति ऐसे ही किसी क्षुद्रग्रह के टकराने से हुई थी । पिछली बार पृथ्वी के इतने निकट से कोई क्षुद्रग्रह 31 अगस्त, 1925 को गुजरा था ।

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2002 एन टी 7 की पृथ्वी के साथ सम्भावित टक्कर को टालने के लिए आस्ट्रेलियाई खगोलविद् विंस फोर्ड ने चार किमी. व्यास के इस क्षुद्रग्रह को परमाणु हथियारों की सहायता से नष्ट करने का सुझाव दिया है । पाँच ग्रहों के एक साथ आने की दुर्लभ, घटना 24 अप्रैल से 9 मई, 2002 के दौरान एक दुर्लभ खगोलीय घटना हुई जब पाँच ग्रह मंगल, बुध, वृहस्पति, शुक्र एव शनि आकाश मे एक साथ पास-पास देखे गये ।

मिचिगन विश्वविद्यालय के एब्रम्स प्लेनीटोरियम के खगोलशास्त्री रॉबर्ट सी. विक्टर के अनुसार आने वाले सौ वर्षों में ऐसी घटना तीन बार होगी । यह घटनाएँ सितम्बर 2040, जुलाई 2060 व नवम्बर 2100 में होने की बात उन्होंने कही हैं । अमरीकी अंतरिक्ष वैज्ञानिकों ने ब्रह्माण्ड के सबसे ठण्डे हिरसे का चित्र फरवरी 2003 में जारी किया है । इसका तापमान-272 डिग्री सैंटीग्रेड बताया गया है जो पूर्व शीतलता के मानक तापमान-373.15 डिग्री सेंटीग्रेड से मात्र एक डिग्री ऊपर है ।

सौर मण्डल के सबसे बड़े ग्रह बृहस्पति के नए उपग्रहों की खोज का सिलसिला मार्च-अप्रैल 2003 में जारी रहा है । हवाई विश्वविद्यालय के प्रो. डेविड जेविट के नेतृत्व में खगोलविदों ने इस ग्रह के कुल मिलाकर 18 नए उपग्रहों की खोज सन् 2003 में ही अप्रैल के पूर्वार्द्ध तक कर ली थी । नए खोजे गए सभी उपग्रह छोटे-छोटे आकार के हैं । इस श्रुंखला में अभी कुछ और उपग्रहों की खोज की सम्भावना इन खगोलविदों ने व्यक्त की है ।

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नेपच्युन के तीन उपग्रहों की खोज वरुण के तीन नए उपग्रहों की खोज का दावा अमरीकी खगोलविदों ने जनवरी 2003 में किया है । इन्हें मिलाकर वरुण के उपग्रहों की कुल संख्या 11 होगी । कनाडा के एक खगोल विज्ञानी बिल येउंग ने दावा किया है कि पृथ्वी का एक और छोटा उपग्रह है ।

J002E3 नाम से इस पिण्ड का एस्टेरॉइड के रूप में मान्यता अभी तक प्राप्त है, किन्तु येउंग ने दावा किया है कि यह ‘एस्टेरॉइड’ सूर्य की कक्षा मे नहीं, बल्कि पृथ्वी की कक्षा में परिभ्रमण कर रहा है । येउंग के अनुसार यह पृथ्वी का एक चक्कर 49.5 दिन में लगाता है ।

सौरमण्डल मे इस विशाल पिण्ड की खोज वैज्ञानिकों ने 2002 के दौरान की है । खगोल शास्त्रियों माइकल ब्राउन (कैलीफोर्निया इंस्टीट्‌यूट ऑफ टेक्नोलॉजी) व कैडविक टूजिल्लों के अनुसार इसे सौरमण्डल का दसवां ग्रह माना जा सकता है ।

इसका व्यास लगभग 1286 किमी. है, जो पृथ्वी के व्यास के दसवें हिस्से के बराबर है । टेलीस्कोप की मदद से देखने का दावा उपर्युक्त खगोल विज्ञानियों ने किया था तथा बाद में आंतरिक्ष में स्थित हब्वल दूरबीन की सहायता से भी इसकी उपस्थिति की पुष्टि ‘नासा’ ने की है ।

भारत में सबसे कम, केवल 14 वर्ष की उम्र में माइक्रोसॉपट सर्टिफाइड सिस्टम इंजीनियर बने जयपुर के युवा वैज्ञानिक अक्षत सिंघल के नाम पर एक क्षुद्रग्रह का नामकरण ‘सिंघल’ किया गया है । मंगल व बृहस्पति ग्रहों के बीच क्षुद्रग्रहो की बैल्ट में अभी तक क्षुद्र क्रमांक 12599 के रूप में जाने वाले ऐस्टेरॉइड को यह नाम अमरीका के मैसाचुसेट्‌स इंस्टीटयूट ऑफ टेक्नोलॉजी CMIT की पहल पर दिय गया है ।

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सर्वाधिक समय तक अंतरिक्ष प्रवास का नया रिकॉर्ड-दिसम्बर 2001-जन 2002 के दौरान अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पर रहे तीन प्रवासियों में से दो ने अंतरिक्ष में रहने का नया रिकॉर्ड स्थापित किया है । इन अंतरिक्ष यात्रियों को अमरीकी स्पेस शटल एंडेवर की 5-17 जून, 2002 की उड़ान द्वारा वापस पृथ्वी पर लाया गया ।

जेरी रास बने सात बार अंतरिक्ष यात्रा पर जाने वाले पहले अंतरिक्ष यात्री-54 वर्षीय अमरीकी अंतरिक्ष यात्री जेरी रास विश्व के ऐसे पहले अंतरिक्ष यात्री हो गए हैं, जिन्हें सर्वाधिक सात बार अंतरिक्ष यात्रा पर जाने का श्रेय प्राप्त हुआ है । फ्रांस के कुछ वैज्ञानिकों ने एक उपग्रह के माध्यम से 50 हजार वर्ष बाद के लोगों को आज की दुनिया का संदेश भेजने की एक योजना बनाई है ।

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इन संदेशों को विशेष रूप से बनाए गए डीवीडी में स्टोर करके एक विशेष उपग्रह मे टाइम कैप्सूल में रखा जायेगा । लियो नाम के इस उपग्रह को वर्ष 2003 में प्रेक्षेपित कर 1800 किमी. ऊँची कक्षा में स्थापित करने की योजना है । यह उपग्रह 30 हजार वर्ष के पश्चात् सन् 52002 में स्वत: ही पृथ्वी पर वापस आयेगा तथा इसके टाइम कैप्सूल में रखे संदेश उस समय लोगों को प्राप्त हो सकेंगे ।

रूसी अंतरिक्ष कार्यक्रम को एक बड़ा धक्का 15 अक्टूबर, 2002 को उस समय लगा जब एक शोध उपग्रह को लेकर उड़ान भरे उसके सोयुज-यू रॉकेट मे प्रक्षेपण के 29 सेकण्ड बाद ही विस्फोट हो गया । रॉकेट का जलता हुआ मलवा प्रक्षेपण केन्द्र पर गिरने से एक कर्मचारी की तत्काल मृत्यु हो गई तथा 8 अन्य लोग इसमें घायल हुए हैं ।

कल्पना चावला के बाद अंतरिक्ष यात्रा करने वाली भारतीय मूल की दूसरी महिला सुनीता लिन विलियम्स होंगी । ‘नासा’ द्वारा सुनीता का चयन अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन अभियान 10 के लिए किया गया है । सुनीता विलियम्स अब अमरीकी नागरिक है ।

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