शिक्षक दिवस पर निबन्ध | Essay for Kids on Teacher’s Day in Hindi!

1. भूमिका:

शिक्षक यानी गुरु को ईश्वर से भी महान् कहा गया है । गुरु के बिना हम सुखी और शांत जीवन जीना नहीं सीख सकते । गुरु ही हमें जीवन की ऊँच-नीच और अच्छे-बुरे का ज्ञान कराते हैं जिससे हम अपने तथा दूसरों के जीवन को सुखी बना सकते हैं । प्रत्येक वर्ष 5 सितम्बर को मनाया जानेवाला शिक्षक दिवस हमें यह याद दिलाता है कि गुरु का स्थान सदैव सबसे ऊँचा है और हमें अपने गुरुजनों का पूरा आदर-सम्मान करना चाहिए ।

2. महत्त्व:

हर साल 5 सितम्बर को देश के महान दार्शनिक (Philosopher) एवं शिक्षक सर्वपल्ली डॉ. राधाकृष्णन का जन्मदिन शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाता है । उनका जन्म इसी दिन सन् 1888 में हुआ था । डॉ राधाकृष्णन मुख्य रूप से (Mainly) दर्शनशास्त्र (Philosophy) के शिक्षक थे ।

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अपने ज्ञान से वे विद्यार्थीर्यों को बहुत प्रभावित (Influenced) कर दिया करते थे । राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी भी उनके ज्ञान से प्र भावित थे । देश-विदेश के कई विश्वविद्यालयों (Universities) में उन्होंने अपने व्याख्यान (Lectures) दिये जो आज भी याद किये जाते हैं ।

आन्ध्र विश्वविद्यालय कलकत्ता विश्वविद्यालय त था काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के कुलपति (Vice Chancellor) का पद भी उन्होंने स भाला । वे मॉस्को में भारत के राजदूत (Ambassador) भी रहे और अंत में भारत के उपराष्ट्रपति (Vice Chancellor) का पद और फिर डी. राजेन्द्र प्रसाद के बाद देश के दूसरे राष्ट्रपति (President) बने । पाटलीपुत्र के चाणक्य का शिक्षक से प्रधानमंत्री बनना इतिहास की एक बड़ी घटना थी और डॉ. राधाकृष्णन जैसे एक महान शिक्षक का राष्ट्रपति होना एक और गौरव (Pride) की बात है ।

3. आयोजन:

जब से डा. राधाकृष्णन केनाम पर शिक्षक दिवस मनाने की परम्परा (Tradition) शुरू हुई है तब से जनसामान्य (Common People) तथा सरकार का ध्यान शिक्षकों की बुरी स्थिति (Poor Condition) की ओर गया है । इस दिन राधाकृष्णन को श्रद्धांजलि (Graditute) देने के अलावा देश भर के शिक्षक वर्ग के प्रति सम्मान प्रकट करने के लिए तरह-तरह के कार्यक्रम (Graditude) होते हैं, विद्यालयों की कक्षाएँ बन्द रहती हैं और शिक्षकों को उनके महत्त्वपूर्ण कार्यों के लिए पुरस्कार (Prize and Awards) दिये जाते हैं ।

4. उपसंहार:

शिक्षक की जो गरिमा (Glory) हमारे देश के वेद-पुराणों में बतायी गयी है, उसे बनाये रखने के लिए शिक्षकों को पुरस्कार देना ही काफी नहीं है बल्कि उनके महत्त्व (Importance) को पहचानने की भी जरूरत है ।

आज यदि अध्यापक पुरस्कार पाकर प्रसन्न होने के बदले यदि पुरस्कार देने वाले समाज के सबसे ऊँचे वर्ग (Class) में अपना स्थान बना सकें, तो सच्चे अर्थों में शिक्षक दिवस मनाना सफल हो सकता है ।

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