Here is an essay on ‘Pragmatism’ in Hindi language!

उपयोगितावाद भूगोल का वह दर्शन है, जिसमें अनुभव के आधार पर प्राप्त ज्ञान विभिन्न तथ्यों व मानव हित में उनका प्रयोग किए जाने पर ध्यान दिया जाता किन करने में अपने अनुभव, प्रयोगात्मक खोजवीन और सत्यता का प्रयोग करता है, उसका यह चिंतन इन समस्याओं के हल करने में इतना मददगार होता है कि वह उसकी उपयोगिता को बढ़ाने में सहायक होता है ।

आर॰एन॰ बेक (R.N. Beck) ने बताया है कि उपयोगितावाद दर्शन का वह स्तर है, जिसमें अनुभवों द्वारा प्राप्त ज्ञान समस्याओं की जाँच करने में सहायक होता है । इन समस्याओं के साथ वह सामंजस्य स्थापित करता है । तथा इन समस्याग्रस्त स्थितियों में अपनी उपयोगिता को बढ़ाकर उनका हल ढूंढना है ।

उपयोगितावाद भी प्रत्यक्षवाद की भांति वैज्ञानिक नियमों पर आधारित है । दोनों में अन्तर केवल इतना है कि यह चिन्तन मानव समस्याओं के हल की दिशा में प्रयासरत रहता है जबकि प्रत्यक्षवाद समस्याओं को पहचानने तक सीमित रहता है । उपयोगितावाद में मानव मूल्यों को अधिक महत्व दिया जाता है ।

यह भौगोलिक वातावरण में समाज की समस्याओं को हल करने का सुझाव देता है मानव जिन भौगोलिक परिस्थितियों में रहता है, वहां रहने वाला समाज की जिन समस्याओं का सामना करता हैं, मानव उसके साथ सामन्जस्य स्थापित करके अपना जीवन व्यतीत करता है, वह उसकी उपयोगिता को बढ़ा देता है ।

उदाहरणत: पनामा नहर के निर्माण व संचालन में जो भौतिक रुकावटें आई उनका मानव ने हल फूटकर अर्थात लोहे के फाटकों द्वारा जल का स्तर ऊँचा उठाकर जलयान संचालन को सुगम बनाकर उसकी उपयोगिता को बढ़ा दिया है । स्पष्ट है कि यह चिन्तन कर्म प्रधान भी है व उपभोक्ता प्रधान भी ।

शोधकर्ता अपने शोध क्षेत्र की समस्याओं को पहचानता है, उनका हल ढ़ूढंता है, ताकि उनके हल द्वारा सम्बन्धित क्षेत्र की जनसंख्या को लाभ पहुँचाया जा सके । वर्तमान में समन्वित ग्रामीण विकास योजनाएँ किसी चिन्तन से प्रभावित है । भूगोलविद् विकास से सम्बन्धित समस्याओं को हल करने की दिशा में जो सुझाव देता है, उसके कारण उसको अभिकर्ता (Action Agent) का नाम भी दिया जस्ता है ।

उपयोगितावाद उन कार्यों का चिन्तन है । जो मानव समाज के कल्याण के लिए किए जाते हैं । यह कार्यों के नियोजन का चिन्तन न होकर उनके क्रियान्वन का चिन्तन है । प्रत्येक नियोजित कार्य का एक लक्ष्य होता है । इसमें मानव मूल्य समाहित रहते हैं । यह वास्तविकता के काफी समीप होता है ।

अत: स्पष्ट है कि जहां उद्देश्यवाद मानव कल्याण की योजनाएँ मानव मूल्यों को ध्यान में रखकर प्रस्तुत करता है, वहीं उपयोगितावाद उन योजनाओं के क्रियान्वन पर जोर देता है, जो मानव मूल्यों को ध्यान में रखते हुए किए जाते हैं । वर्तमान में पर्यावरण में प्रदूषण बढ़ने के साथ इनकी कीमत बहुत बढ़ गई है ।

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यह व्यवहारिक (Applied) चिन्तन है, जो समाज की समस्याओं का हल उसके उपयोग अर्थात् लाभ की दृष्टि से खोजता है । इसी कारण यह प्रयोगात्मक सोच है । वह सामान्य नियमों एवं सिद्वान्तों से बंधे रहने के साथ-साथ इनको हल का निर्देशन देता है । उपयोगितावादी विचारक सैद्वान्तिक नियमों के साथ-साथ प्रायोगिक स्थिति पर भी ध्यान देता है ।

भूगोलविद् भौगोलिक परिस्थितियों को ध्यान में रखकर क्षेत्रीय स्थानीय समस्याओं का पर्यवेक्षण करता है, और समाज को सुधारने की भावना के साथ उनका हल प्रस्तुत करता है । उदाहरणत: टिहरी बाँध परियोजना का उद्देश्य जल विद्युत उत्पादन है, जिसकी मानव समाज को अधिक आवश्यकता है । यद्यपि इसके लिए अनेक गांवों को उजाड़ा गया है, लेकिन इस परियोजना के लाभ उस नुकसान की अपेक्षा अधिक उपयोगी माने गए हैं ।

उपयोगितावाद की विशेषताएँ:

1. यह सैद्वान्तिक नियमों का पालन मानव कल्याण की दृष्टि से देखता है । इसी कारण यह व्यवहारिक भूगोल कहलाता है ।

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2. यह हमें वास्तविकताओं के समीप लाता है ।

3. भौगोलिक स्थान की विशेषता को परिवर्तनीय मानता है । मानव अपने ज्ञान के साथ उसके रूप में परिवर्तन लाता हैं, जहाँ आज कृषि होती है, वही स्थान आने वाले समय में अपनी सुविधाजनक स्थिति के कारण औद्योगिक विकास को जन्म दे सकता है ।

4. भौगोलिक स्थान समय विशेष के मानव विचारों की अभिव्यक्ति होता है ।

5. भौगोलिक स्थानों की सरंचना का निर्माण अथवा पुर्ननिर्माण मानव समस्याओं के हल करने की दृष्टि से किया जाता है, ताकि यह परिवर्तन मानव के लिए अति उपयोगी साबित हो सके ।

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6. स्थानिक वास्तविकता मानव अनुभव की संयुक्त अभिव्यक्ति को बताती है ।

7. स्थान विशेष के अध्ययन के लिए परिकल्पनाओं (Hypothesis) की रचना पर मानव ज्ञान का प्रभाव हावी होता है । यह परिकल्पनाएं मानव ज्ञान में वृद्धि के साथ-साथ संशोधित की जाती रहती है । मानव हित की दृष्टि आज की सोच आने वाले कल की दृष्टि से अनुपयोगी व अहितकारी हो सकती है । परमाणु शक्ति को विकास की परिकल्पना प्रारम्भ में एक अलग दृष्टिकोण से जुड़ी थी, उसके विध्वंसकारी प्रभावों को देखते हुए आज उसके रचनात्मक उपयोग की योजनाएं बनाई जाने लगी है, जो मानव हित की दृष्टि से अत्यन्त उपयोगी हैं ।

8. आज भौगोलिक अध्ययन उद्देश्यात्मक है । भूगोलविद् एक क्षेत्र का अध्ययन इस दृष्टि से करने का प्रयास करता है कि वह मानव के लिए कौन-कौन सी उपयोगी व कल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वन की संस्तुति कर सकता है । ऐसा वह वैज्ञानिक विधियों के परिपेक्ष्य में करता है ।

उपयोगितावाद मानव को केन्द्र मानता है । वह मानव के ज्ञान, सोच, व्यवहार, इच्छओं व आशाओं पर ध्यान देता है । इन मानवीय गुणों का समावेश समस्याओं के हल में निहित होता है । मानव के सभी कार्य चाहें वह आवास, जीवन यापन, से सम्बन्धित हों या विभिन्न सुविधाओं जैसे चिकित्सा, स्वास्थ्य, शिक्षा, परिवहन के विस्तार से सम्बन्धित हो ।

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चाहे वह पर्यावरण के साथ समजस्य स्थापित करने, समाज में व्याप्त असमानता मिटाने, पिछड़े क्षेत्रों के विकास की योजनाएँ बनाने से संबन्धित हो, उपयोगितावादी चिन्तन की पुष्टि करते हैं । उसके इन कार्यों में मानव कल्याण की भावना निहित रहती है । और यह मानव के सर्वागींण विकास के लिए उपयोगी होते हैं । उसके निर्णय मानव मूल्य आधारित होते हैं ।

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ऐसा करने में वह भौगोलिक नियमों की अवहेलना नहीं करता है । वह समय व स्थान के साथ मानव की बदलती आवश्यकताओं के अनुरूप विकास की योजनाएँ तैयार करता है, ताकि उनकी उपयोगिता बनी रहे । समय-समय पर वह इनमें संशोधन करता रहता है ।

अनुभवों से उसे जो ज्ञान प्राप्त होता है, उससे वह अपने आपको और भी उपयोगितावादी चिन्तन के समीप पाता है । उदाहरण के तौर पर एक कृषक अनुकूल भौगोलिक परिस्थिति में यदि धान का उत्पादन करता है, तो वह समय-समय पर विकसित नई प्रजातियों का प्रयोग करके उत्पादन बढ़ान में प्रयासरत रहता है, नए-नए बीजों का प्रयोग करने के लिए सिंचाई, नवीन कृषि यंत्र, कीटनाशक दवाओं आदि जिस साधन की भी आवश्यकता होती है, वह उन्हें जुटाता है और कृषि भूमि को उत्पादन के लिए और भी उपयोगी बना देता है ।

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भूमि को किस प्रकार के कार्यों में प्रयुक्त किया जाए, ताकि उसको अधिक से अधिक लाभ मिले तथा भौगोलिक परिस्थितियों में किसी प्रकार का अवरोध पैदा न हो, यह उसकी उपयोगितावादी सोच का परिणाम है । नगर के व्यापारिक क्षेत्र के समीप किस प्रकार, के उद्योग स्थापित हों, कि उनकी वहां उपस्थिति बनी रहे, और उनके उत्पाद की कीमत बाजार के अनुरूप बनी रहे । यह उपयोगितावादी विचारधारा के ही एक अंग है ।

इसमें यह भावना अन्तनिर्हित है कि उपभोक्ता को वह उत्पाद ऐसे मूल्य पर मिले जिससे उस उत्पाद की माँग भी बनी रहे व उद्योग के विकास को भी बढ़ावा मिले । यहाँ विदित होता है कि उपयोगितावाद में मानव एक प्रमुख तथ्य है । उसके विचार हमारी क्रियाएं निश्चित करते है और वह इन क्रियाओं को अपने अनुभवों द्वारा निर्धारित करता है ।

मानवतावादी भूगोल मानव और विज्ञान का समन्वय है । मानव की यह समन्वयक सोच समाज के लिए नियमों के अन्तर्गत उसके कल्याण से जुड़ी होती है । मानव समझ व ज्ञान उद्देश्यात्मक एवं विषयमूलक, आदर्श एवं भौतिक आचरण का समन्वय है । स्पष्ट है कि उपयोगितावाद की सार्थकता तभी है, जब वह मानव कल्याण की योजनाओं से जुड़ी हो ।

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